रामायण बालकाण्ड भाग १३ रामायण बालकाण्ड भाग १३

रामायण बालकाण्ड भाग १३ यहां रामायण के बालकाण्ड,अयोध्याकाण्ड,अरण्यकाण्ड,किष्किन्धाकाण्ड,सुन्दरकाण्ड,लंकाकाण्ड,उत्तरकाण्ड का विवरण जो बुकसमे वेस करने की कोशिस है.कुछ तृटि रह जाये तो ध्यान देने की कृपा करना. दोहा- लखन उतर आहुति सरिस भृगुबर कोपु कृसानु। बढ़त देखि जल सम बचन बोले रघुकुलभानु॥२७६॥ नाथ करहु बालक पर छोहू। सूध दूधमुख करिअ न कोहू॥ जौं पै प्रभु प्रभाउ कछु जाना। तौ कि बराबरि करत अयाना॥ जौं लरिका कछु अचगरि करहीं। गुर पितु मातु […]

रामायण बालकाण्ड भाग १२

रामायण बालकाण्ड भाग १२ यहां रामायण के बालकाण्ड,अयोध्याकाण्ड,अरण्यकाण्ड,किष्किन्धाकाण्ड,सुन्दरकाण्ड,लंकाकाण्ड,उत्तरकाण्ड का विवरण जो बुकसमे वेस करने की कोशिस है.कुछ तृटि रह जाये तो ध्यान देने की कृपा करना. दोहा- तमकि धरहिं धनु मूढ़ नृप उठइ न चलहिं लजाइ। मनहुँ पाइ भट बाहुबलु अधिकु अधिकु गरुआइ॥२५०॥ भूप सहस दस एकहि बारा। लगे उठावन टरइ न टारा॥ डगइ न संभु सरासन कैसें। कामी बचन सती मनु जैसें॥ सब नृप भए जोगु उपहासी। जैसें बिनु […]

रामायण बालकाण्ड भाग ११

रामायण बालकाण्ड भाग ११ यहां रामायण के बालकाण्ड,अयोध्याकाण्ड,अरण्यकाण्ड,किष्किन्धाकाण्ड,सुन्दरकाण्ड,लंकाकाण्ड,उत्तरकाण्ड का विवरण जो बुकसमे वेस करने की कोशिस है.कुछ तृटि रह जाये तो ध्यान देने की कृपा करना. दोहा- प्रेम मगन मनु जानि नृपु करि बिबेकु धरि धीर। बोलेउ मुनि पद नाइ सिरु गदगद गिरा गभीर॥२१५॥ कहहु नाथ सुंदर दोउ बालक। मुनिकुल तिलक कि नृपकुल पालक॥ ब्रह्म जो निगम नेति कहि गावा। उभय बेष धरि की सोइ आवा॥ सहज बिरागरुप मनु मोरा। […]

रामायण बालकाण्ड भाग १०

रामायण बालकाण्ड भाग १० यहां रामायण के बालकाण्ड,अयोध्याकाण्ड,अरण्यकाण्ड,किष्किन्धाकाण्ड,सुन्दरकाण्ड,लंकाकाण्ड,उत्तरकाण्ड का विवरण जो बुकसमे वेस करने की कोशिस है.कुछ तृटि रह जाये तो ध्यान देने की कृपा करना. दोहा- भरद्वाज सुनु जाहि जब होइ बिधाता बाम। धूरि मेरुसम जनक जम ताहि ब्यालसम दाम॥।१७५॥ काल पाइ मुनि सुनु सोइ राजा। भयउ निसाचर सहित समाजा॥ दस सिर ताहि बीस भुजदंडा। रावन नाम बीर बरिबंडा॥ भूप अनुज अरिमर्दन नामा। भयउ सो कुंभकरन बलधामा॥ सचिव जो […]

रामायण बालकाण्ड भाग ९

रामायण बालकाण्ड भाग ९ यहां रामायण के बालकाण्ड,अयोध्याकाण्ड,अरण्यकाण्ड,किष्किन्धाकाण्ड,सुन्दरकाण्ड,लंकाकाण्ड,उत्तरकाण्ड का विवरण जो बुकसमे वेस करने की कोशिस है.कुछ तृटि रह जाये तो ध्यान देने की कृपा करना. दोहा- नील महीधर सिखर सम देखि बिसाल बराहु। चपरि चलेउ हय सुटुकि नृप हाँकि न होइ निबाहु॥१५६॥ आवत देखि अधिक रव बाजी। चलेउ बराह मरुत गति भाजी॥ तुरत कीन्ह नृप सर संधाना। महि मिलि गयउ बिलोकत बाना॥ तकि तकि तीर महीस चलावा। करि छल […]

 
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