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आज मानव समाज में ब्राह्मण समाज का अपना अलग महत्व है, लेकिन चिन्तनशील ब्राह्मणों में यह प्रश्न बार-बार उठ रहा है कि आज के बदलते परिवेश में ब्राह्मण को ब्राह्मणत्व का बोध होना अति आवश्यक है ।

मेरे विचारों में बार-बार यह बात गुंजती है कि ब्राह्मण चरित्र आचरण व्यवहार कर्मवाणी के उच्च मापदंडों पर खरा उतरे । अर्थात चरित्र से सुन्दर एवं निष्कलंक हो । आचरण से विवेकी पारखी संतों की तरह आत्म बोध से परिपूर्ण हो और व्यवहार से मधुर विनम्र सरल एवं सहज हो । एवं वाणी से मुदृभाषी हो ।

विषम परिस्थितियों में भी क्रोध एवं अहंकार को अपने जीवन में न उतारे । सहनशीलता रखे सारे दुगुर्णों से दूर रहकर एक सुन्दर समाज के निर्माण का प्रयास करें । ब्राह्मण समाज में तभी सम्मानित हो सकता है । जब वह समाज के सामने दर्पण की तरह हो, मेरा यहां तक मानना है कि बीड़ी, तम्बाखू, गुड़ाखू, शराब, मांस का भी सेवन अगर ब्राह्मण करता है तो समाज में ब्राह्मणत्व की गरिमा को ठेस पहुंचाता है । ब्राह्मण सारे दुगुर्णों से दूर रहकर बहुजन हिताय बहुजन सुखाय की भावना को लेकर अगर कोई काम करें तो समाज में ब्राह्मण की एक अलग पहचान होगी ।

धर्म के आड़ में अगर कोई पुरोहित पंडित किसी को ठगता है या धोखा देता है तो वह अपने आप को धोखा देता है । मैं यह बात आपको एक उदाहरण के माध्यम से समझाने का प्रयास कर रहा हूं ।

एक पंडित जी थे उनके पास एक व्यक्ति गया वह व्यक्ति कुछ दिनों से शारीरिक अस्वस्थता से परेशान था, पंडित जी ने उस व्यक्ति को देखकर कहा कि आपके उपर राहू एवं शनि का प्रकोप चल रहा है, हवन आदि कराना पड़ेगा । चूंकि व्यक्ति अस्वस्थ था वह व्यक्ति तुरंत तैयार हो गया एवं पंडित जी से पूछा कि महाराज क्या खर्च लगेगा हवन पूजन कराने में ? पंडित जी जी उस व्यक्ति को जानते थे कि वह व्यक्ति संपन्न है । उन्होंने तुरन्त् कहा कि हवन आदि के लिए आपको 11000/- रुपये खर्च लगेगा । आप पैसा लाकर छोड़ दे । मैं हवन अनुष्ठान आदि करुंगा । उन्होंने पैसा छोड़ दिया । पंडित जी ने हवन किया या नहीं पंडित जी जाने लेकिन मुझे जब इस बात की जानकारी मिली तो मैंने उस पीड़ित व्यक्ति को तुरंत कहा दादा जी आप बेकार किसी पंडित के चक्कर में न पड़े, एवं किसी डाक्टर से अपना उपचार करावे । तब पीड़ित व्यक्ति डाक्टर के पास गया तो डाक्टर ने जब उस व्यक्ति को चेक किया तब उस व्यक्ति का हीमोग्लोबिन कम निकला जिसके कारण उनका शरीर अस्वस्थ था । इस प्रकार का कृत्य ब्राह्मणों के द्वारा किया जाता है तो समाज को धोखा देता है । एवं अपने आपको धोखा देता है । अंत में मैं यह कहना चाहूंगा कि ब्राह्मण कर्मवादी एवं चरित्र, आचरण, व्यवहार, कर्मवाणी से सुन्दर एवं विनम्र हो । एवं अपने जीवन में प्रेम, करुणा, दया, क्षमा, परोपकरा का भाव लेकर समाज के सामने एक आदर्श प्रस्तुत करें । क्योंकि ब्राह्मण समाज का सिर होता है । विद्वान एवं प्रबुध्द समाज में ब्राह्मणों की गिनती होती है । ब्राह्मण पूरे मानव समाज को दिशा देने वाला होता है । यह बात हमारे पुराणों एवं धर्म ग्रन्थों में भी आता है । अत: ब्राह्मण जहां भी जाय समाज में स्थापित हो तभी ब्राह्मणों का सम्मान होगा एवं ब्राह्मण-ब्राह्मण कहलाने का पात्र माना जायेगा ।

माननीय अध्यक्ष जी मैंने अपनी बात ‘’ब्राह्मण कौन’’ के माध्यम से विप्र वार्ता पत्रिका में समाहित करने का प्रयास किया । मुझे ऐसा महसूस हो रहा है कि इस लेख के माध्यम से –
1. दुर्व्यसन मुक्त ब्राह्मण समाज
2. चिन्तनशील ब्राह्मण समाज
3. विशाल व्यक्तित्व का धनी ब्राह्मण समाज
4. चरित्र निर्माण के माध्यम से देश एवं समाज में स्थापित होकर मानव कल्याण की ओर अग्रसर होगा –

 

इन्हीं शुभकामनाओं के साथ । – नरेंद्र मिश्रा, विवेकानंद नगर धमतरी

 

Jitendra Ravia (114 Posts)

Indian Journalist/Reporter, Editor of Daily News Paper, Writer/author of Magazine jeevanshailee, with responsibility of the Electronic media channel, GTPL.


 

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Posted on Jan - 2 - 2012

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